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अष्टांग योग के फायदे

  • अष्टांग योग के आठ अंग होते हैं 

  1. 1- यम
    2- नियम
    3- आसन
    4- प्राणायाम
    5- प्रत्याहार
    6- धारणा
    7- ध्यान
    8- समाधी

 

अष्टांगयोग

योग को लेकर कई परिभाषाएं मौजूद हैं जिनमें से दो प्रमुख हैं। पहली परिभाषा के अनुसार गीता में लिखा है “योग: कर्मसु कौशलम्” अर्थात् फल की इच्छा के बिना कर्म की कुशलता ही योग है। दूसरी परिभाषा महर्षि पतंजलि द्वारा दी गई जिन्हें योग गुरू या जनक माना जाता है। महर्षि के अनुसार “योगश्चित्तवृत्तिनिरोध:” यानी मन की इच्छाओं को संतुलित बनाना योग कहलाता

 

लाभ

1.योग से मस्तिष्क शांत होता है जिससे तनाव कम होकर ब्लड प्रेशर, मोटापा और कोलेेस्ट्रॉल में कमी आती है।

2. मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

3. नर्वस सिस्टम में सुधार होता है।

4. शरीर की रोगों से लड़ने की ताकत में इजाफा होता है। जिससे आप बार-बार बीमार नहीं पड़ते।

5. आयुर्वेद और योग एक-दूसरे के पूरक- आयुर्वेद विज्ञान है और योग विज्ञान का अभ्यास, ये दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। योग विशेषज्ञ अंजलि शर्मा के अनुसार योग और आयुर्वेद यह समझ विकसित करने में मदद करते हैं कि शरीर कैसे काम करता है और खानपान एवं दवाओं का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है। रोजाना योग करने से शरीर के अंगों के काम करने की क्षमता में सुधार आता है। इससे शरीर में रक्त प्रवाह भी सुधरता है और तनाव दूर करने में मदद मिलती है।

6. अष्टांग योगा के अभ्यास से शरीर को लचीला बनाया जा सकता है।

7. अष्टांग योगा करने से दिमाग तेज होता है और आदमी की उम्र भी बढती है।

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